Monday, December 11, 2023

आर्टिकल 370 के निरस्तीकरण पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला: जजों के विचार और राय

भारत के संविधान के अनुच्छेद 370, जिसे जम्मू और कश्मीर के विशेष दर्जे का प्रावधान करने वाला अनुच्छेद कहा जाता है, को 5 अगस्त, 2019 को केंद्र सरकार द्वारा निरस्त कर दिया गया था। इस ऐतिहासिक फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने 5 अगस्त, 2020 को सुनाया था। इस फैसले को सुनाने वाली बेंच में पांच जज शामिल थे।



**बेंच के अध्यक्ष थे जस्टिस रंजन गोगोई**


बेंच के अध्यक्ष थे जस्टिस रंजन गोगोई। गोगोई भारत के 46वें मुख्य न्यायाधीश थे। उन्होंने 30 जून, 2018 से 30 जून, 2022 तक इस पद पर कार्य किया। गोगोई ने 2018 में आर्टिकल 370 के निरस्तीकरण के मामले की सुनवाई शुरू की थी।



**बेंच के अन्य जज थे जस्टिस शरद अरविंद बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस संजय किशन कौल**


बेंच के अन्य जज थे जस्टिस शरद अरविंद बोबडे, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस संजय किशन कौल।


**जस्टिस शरद अरविंद बोबडे**


जस्टिस शरद अरविंद बोबडे भारत के 47वें मुख्य न्यायाधीश थे। उन्होंने 30 जून, 2022 से 24 अप्रैल, 2023 तक इस पद पर कार्य किया। बोबडे ने आर्टिकल 370 के निरस्तीकरण के मामले में जस्टिस गोगोई के बाद बेंच की अध्यक्षता की।



**जस्टिस अशोक भूषण**


जस्टिस अशोक भूषण भारत के वरिष्ठतम जजों में से एक हैं। उन्होंने आर्टिकल 370 के निरस्तीकरण के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भूषण ने अपने फैसले में कहा कि आर्टिकल 370 संविधान के अनुच्छेद 35A के साथ असंगत था।



**जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़**


जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ भारत के वरिष्ठतम जजों में से एक हैं। उन्होंने आर्टिकल 370 के निरस्तीकरण के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चंद्रचूड़ ने अपने फैसले में कहा कि आर्टिकल 370 को संविधान के अनुच्छेद 35A के साथ संशोधित किया जा सकता था, लेकिन इसे निरस्त नहीं किया जा सकता था।



**जस्टिस संजय किशन कौल**


जस्टिस संजय किशन कौल भारत के वरिष्ठतम जजों में से एक हैं। उन्होंने आर्टिकल 370 के निरस्तीकरण के मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कौल ने अपने फैसले में कहा कि आर्टिकल 370 को संविधान के अनुच्छेद 35A के साथ संशोधित किया जा सकता था, लेकिन इसे निरस्त नहीं किया जा सकता था।



**बेंच का फैसला**


बेंच ने आर्टिकल 370 के निरस्तीकरण को संवैधानिक बताया। बेंच ने कहा कि आर्टिकल 370 संविधान के अनुच्छेद 35A के साथ असंगत था और इसे निरस्त किया जाना चाहिए था। बेंच ने कहा कि आर्टिकल 370 के निरस्तीकरण से जम्मू और कश्मीर को विकास के अवसर मिलेंगे।


बेंच के फैसले को लेकर देश में काफी विवाद हुआ था। कुछ लोगों ने इस फैसले का स्वागत किया, जबकि कुछ लोगों ने इस फैसले का विरोध किया।

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